कैल्शियम की कमी के 10 संकेत? कैल्शियम की कमी के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके (calcium ki kami)

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आज भारत में लगभग 40% लोग यानी 65 करोड़ लोगों  में कैल्शियम के कमी (Calcium ki kami) है कैल्शियम की कमी के कारण शरीर में बहुत सी बीमारियों का जन्म होता हैं।

हाइपोकैल्सिमिया (hypocalcemia) एक बीमारी है जो शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम होने से होता हैं। शरीर में कैल्शियम का स्तर विटामिन-D तथा मैग्नीशियम द्वारा प्रभावित हो सकता हैं। लोगों की लापरवाही के कारण यह कैल्शियम की कमी एक बुरा रूप ले सकती है इसके कमी से पूरे शरीर पर बुरा असर पड़ता हैं।

कैल्शियम का शरीर में काम 

कैल्शियम शरीर के लिए एक बहुत ही एक अहम पोषक तत्व है यह दाँत और हड्डियों के निर्माण में काम आता हैं।

शरीर का 99% कैल्शियम दाँतो और हड्डियों में होता है कैल्शियम दाँतो और हड्डियों का घनत्व बढ़ाकर उनमे मजबूती लाता हैं।

एक वयस्क व्यक्ति के शरीर में कैल्शियम का वज़न 1-2% तक हो सकता हैं।

कैल्शियम के शरीर अन्य कार्य भी है जैसे गर्वधान (fertilisation), हॉर्मोन में संतुलन, मांस में सिकुड़न लाना इत्यादि।

दिल एक लय में धड़कता है जो कि कैल्शियम द्वारा संतुलित रहता हैं। कैल्शियम द्वारा दिल में एक संकेत भेजा जाता है जिससे कि दिल की मांस-पेशियो में सिकुड़न होता है और दिल धड़कता हैं।

कैल्शियम शरीर में खून जमने से रोकता है तथा चोट के हिस्सों में खून जमाने में भी मदद करता हैं।

नर्व सेल्स में न्यूरो-ट्रांसमीटर होता है जिसके द्वारा शरीर में संदेश पहुँचते है और यह न्यूरो-ट्रांसमिटर कैल्शियम द्वारा सक्रिय होते हैं। कैल्शियम पैराथाइरोइड (parathyroid) हॉर्मोन तथा शरीर के अन्य रसायनों को सक्रिय करने तथा उनका संतुलन बनाये रखने में भी मदद करता हैं।

कैल्शियम की कमी के लक्षण (Symptoms of calcium deficiency in hindi)

कैल्शियम की कमी के लक्षण को एक इंसान में आसानी से पहचाना जा सकता है लेकिन ज़्यादातर लोग इसको पहचानते हुए भी छोटी बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसी लापरवाही के कारण लोगों को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं।

1.कमर दर्द तथा अन्य हिस्सों में दर्द

किसी कारण से पैराथाइरोइड ग्लैंड शरीर में ज़्यादा मात्रा में हॉर्मोन का उत्पादन करते है तब इस स्तिथि को हाइपरथाइरोइडीज़म कहते हैं। इसमें बीमारी में शरीर हड्डियों और दाँतो से कैल्शियम लेने लगता है और कैल्शियम की कमी के कारण मांस-पेशी, जोड़, और हड्डियों में दर्द होता हैं।

कमर दर्द तथा चलते समय हाथ और बाह में दर्द होना कैल्शियम की कमी का कारण हो सकता हैं।

कैल्शियम की कमी के लक्षण
शरीर में दर्द | थकान

2.ज़्यादा थकान लगना

शरीर में कैल्शियम की कमी होने से शरीर हमेसा थका हुआ रहता हैं। पर्याप्त नींद लेने के बाद भी अगर शरीर नींद की मांग करता है तब यह मांस और हड्डियों में कमज़ोरी का कारण  हैं।

3.हाथ-पैर सुन पड़ना तथा ऐठन आना

कैल्शियम द्वारा मांस में संकेत भेजा जाता है जिसके कारण मांस में सिकुड़न होता हैं। शरीर में कैल्शियम की कमी होने से हाथ, पैर तथा मुँह सुन पड़ने लगते हैं।

कैल्शियम की कमी शरीर के अलग-अलग हिस्सों में ऐठन भी होने लगते हैं।

4.त्वचा और नाखून में बदलाव

कैल्शियम की कमी के लक्षण, त्वचा और नाखूनों में आसानी से दिखते हैं।

कैल्शियम की कमी से त्वचा लाल होने और सूखने लगती है तथा त्वचा में खुजली भी होती हैं।

शरीर में कैल्शियम की कमी से नाखून कमज़ोर हो जाते है और उनमे सूखापन आने लगता हैं।

5.भ्रम होना तथा मूड में बदलाव

कैल्शियम शरीर में संदेश भेजने का काम करते है इसकी कमी से व्यक्ति को भ्रम महसूस होता है अथार्थ जिनमे कैल्शियम की होती वह ज़्यादा सोचते हैं।

6.दाँतो में तकलीफ

खून में कैल्शियम की कमी होने से शरीर दाँतों और हड्डियों से कैल्शियम सोखने लगता हैं। अगर शरीर द्वारा दाँतो से ज़्यादा मात्रा में कैल्शियम सोखने लगे तो दाँतो की समस्यायें उत्पन होती हैं।

कैल्शियम की कमी के लक्षण
दाँतो की समस्या | मेन्सट्रल समस्या

7.पीरियड्स के समय अत्यधिक दर्द होना

प्री-मेन्सट्रल सिन्ड्रोम (premenstral syndrome)  एक ऐसी अवस्था है जिसमे महिलाओं को पीरियड्स के समय पेट में अत्यधिक दर्द होता हैं।

शरीर में कैल्शियम या फिर विटामिन-D की कमी होने से प्री-मेन्सट्रल सिन्ड्रोम की समस्यायेे उत्पन होती हैं।

8.याददाश्त कमज़ोर होना

हमारे शरीर में न्युरॉन सेल्स होते है जिनमे न्यूरो-ट्रांसमीटर होता है, जो शरीर में संदेश भेजने का कार्य करता हैं। कैल्शियम द्वारा न्यूरो-ट्रांसमीटर सक्रिय होते है इसलिए इसकी कमी से याददाश्त कमज़ोर हो सकती हैं।

Calcium ki kami ke lakshan
कमज़ोर यादास्त | बालों का झड़ना

9.बालो का झड़ना

ज़्यादा समय तक कैल्शियम की कमी होने से एलोपेसिया जैसी बीमारी उत्पन हो सकती हैं। एलोपेसिया में गोल आकार में बाल झड़ने लगते हैं। बालों के झड़ने का कारण विटामिन-D व विटामिन-E की कमी हो सकता हैं।

कैल्शियम की कमी का कारण (Calcium ki kami ka karan)

अनेक कारण द्वारा कैल्शियम तथा अन्य पोषक तत्व की कमी हो सकती है जैसे शरीर में पोषक तत्व की कमी, हॉर्मोन के स्तर में बदलाव आना आदि। कैल्शियम की कमी कुछ पोषक तत्व के बढ़ने से भी हो सकती हैं। शरीर में कैल्शियम का स्तर संतुलित करने के लिए पोस्टिक और उचित आहार ज़रूरी होता हैं।

1.आहार में कम कैल्शियम होना

व्यक्ति जो 19 – 50 साल तक के है उन्हें रोज़ाना 1000 मिलीग्राम (mg) कैल्शियम की ज़रूरत होती हैं।

पचास साल से ज़्यादा उम्र के व्यक्तियों को रोज़ाना 1,200 मिलीग्राम (mg) कैल्शियम की ज़रूरत होती हैं।

आहार में कैल्शियम की मात्रा का ध्यान देना अनिवार्य है ताकि कैल्शियम से जुड़ी बीमारियों से बचे रह सके।

कैल्शियम मछली, अंडे, दूध से बनी चीजों तथा हरी पत्ती वाली सब्ज़ियों में ज़्यादा होता हैं।

2.शरीर में कैल्शियम की आवश्यकता बढ़ना

गर्वावस्था के बाद बच्चे के पोषण के लिए माँ के शरीर में दूध का उत्पादन होता हैं।

दूध के उत्पादन में माँ के शरीर को सामान्य से ज़्यादा मात्रा में कैल्शियम की ज़रूरत होती है इसके कारण माँ के शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती हैं।

3.विटामिन-D तथा मैग्नीशियम की कमी

मैग्नीशियम द्वारा शरीर की हड्डियाँ कैल्शियम सोख पाती है इसलिय शरीर में मैग्नीशियम ज़रूरी हैं।

शारीरिक संतुलन बनाए रखने में बराबर मात्रा में मैग्नीशियम और कैल्शियम की ज़रूरत होती हैं।

विटामिन-D, कैल्शियम और अन्य तत्व हड्डियों का निर्माण करते है इसलिए शरीर में विटामिन-D उतना ही ज़रूरत है जितना कैल्शियम।

4.पाचन तथा अंगो में खराबी

हमारा शरीर कच्चा कैल्शियम सीधा सोख नहीं पाता है इसलिए एसिड जो पेट में मौजूद होते है कैल्शियम को नमक में बदल देते है ताकि हमारा शरीर आसानी से कैल्शियम सोख सके।

पाचन सकती कमज़ोर होने से शरीर पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम सोख नहीं पाता है जिससे कारण कैल्शियम की कमी होती हैं।

दस्त, कब्ज़ और अन्य आतों के बीमारियों से कैल्शियम की कमी हो सकती हैं।

5.ज़्यादा पसीना

एक लीटर पसीना से 8 – 265 ग्राम तक कैल्शियम निकल सकता है इसलिए शरीर से ज़्यादा पसीना निकलना कैल्शियम की कमी का कारण हो सकता हैं। यह खिलाड़ियों तथा कसरत करने वालो में ही देखने को मिलती हैं।

6.फॉस्फेट का स्तर बढ़ना

अगर किडनी अच्छे से काम न करे तो खून में फॉस्फेट की मात्रा बढ़ने लगती हैं।

खून में फॉस्फेट की मात्रा बढ़ने से फॉस्फेट कैल्शियम को बाँधने लगते है जिससे कि शरीर मे कैल्शियम की स्तर गिरने लगता हैं।

7.हॉर्मोन में बदलाव

शरीर पैराथाइरोइड ग्लैंड द्वारा पैराथायरोक्सिन हॉर्मोन (PTH) खून में छोड़ता है जो कि शरीर में कैल्शियम का संतुलन बनाय रखने में मदद करता हैं।

PTH की कमी से शरीर में कैल्शियम की कमी होती है अगर PTH की मात्रा खून में बढ़ जाता है तो यह अत्यधिक मात्रा में हड्डियों और दाँतों से कैल्शियम सोखने लगता है जिससे कि हड्डियाँ और दाँत कमज़ोर हो जाती हैं।

8.शराब का ज़्यादा सेवन

अत्यधिक शराब के सेवन से कैल्शियम से जुड़ी समस्यायें उत्पन हो सकती हैं। शराब से शरीर में विटामिन-D का संतुलन बिगाड़ सकता है विटामिन-D शरीर को कैल्शियम सोखने में मदद करता हैं।

शराब से शरीर में पैराथायरोक्सिन हॉर्मोन का स्तर बढ़ सकता है इस हॉर्मोन के बढ़ने से खून हड्डियों से ज़्यादा मात्रा में कैल्शियम सोखने लगते है जिससे कि हड्डियों से जुड़ी बीमारी उत्पन होती हैं।

9.कैफीन का सेवन

दो चम्मच कैफीन 4% तक कैल्शियम सोखने की सकती कम कर सकता है इसे एक कप दूध में मिलाकर पीने से शरीर पर इसका ज़्यादा प्रभाव नहीं पड़ता हैं।

कैल्शियम की कमी (Calcium ki kami) से होने वाले रोग

1.हाइपोकैल्सिमिया (Hypocalcemia)

यह एक अवस्था है जिसमे शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती हैं। यह ज़्यादातर विटामिन-D और मैग्नीशियम की कमी से होता हैं।

कमज़ोर याददास्त, शरीर में ऐठन, हाथ-पैर सुन पड़ना इस बीमारी का लक्षण होता हैं।

2.ओस्टियोपोरोसिस (Ostioporosis)

इस बीमारी में शरीर की हड्डियाँ नरम और कमज़ोर हो जाती हैं। हड्डी नरम इसलिए हो जाते है क्योंकि शरीर में  हड्डियों के सेेल्स का निर्माण बहुत ही कम हो जाता हैं।

सामान्य व्यक्ति के मुकाबले इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की हड्डियों में फ्रैक्चर की संभावना बढ़ जाती हैं।

3.ओस्टियोपेनिया (Ostiopenia)

इस बीमारी में शरीर द्वारा हड्डियों में नए सेल्स का निर्माण बिल्कुल ही खत्म हो जाता हैं। इस अवस्था में हड्डियाँ बहुत ही कमज़ोर हो जाती हैं। महिलाओं में इस बीमारी का खतरा ज़्यादा होता हैं।

शरीर में विटामिन-D की कमी, धूम्रपान, बीमारी तथा कुछ दवाइयों के ज़्यादा इस्तेमाल करने से ओस्टियोपेनिया हो सकता हैं।

कैल्शियम की कमी (calcium ki kami) में आहार

1.हरी पतीली सब्ज़ियों से उचित मात्रा में कैल्शियम होता है रोज़ाना हरी पतीली सब्जियों के सेवन से कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व की कमी दूर हो सकती हैं। हरी सब्जियों में ऑक्सिलेट की मात्रा भी ज़्यादा हो सकती है जो शरीर के कैल्शियम सोखने की शक्ति को कम करता हैं।

2.दाल और अनाज को मुख्य आहार में इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि इनमें कार्बोहायड्रेट, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व होते हैं।

Calcium ki kami में आहार
दूध | बादाम

3.हर प्रकार के बादाम कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर के अच्छा स्रोत होते हैं। अन्य बादाम के मुकाबले आलमंड में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है इसे रोज़ाना भिगाकर खाया जा सकता हैं।

4.दूध और दूध से बनी चीज़ों में विटामिन-D और मैग्नीशियम की मात्रा ज़्यादा होती है यह पोषक तत्व शरीर को कैल्शियम सोखने में मदद करते हैं।

5.सोयाबीन शाकाहारी लोगों के लिए कैल्शियम रहित मुख्य आहार हैं। सोयाबीन को अन्य सब्जियों में मिलाकर खाया जा सकता हैं।

6.कुकुरमुत्ता (Mushroom) में कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और आयरन की मात्रा ज़्यादा होती हैं। यह मौसमी होते है इसलिए आसानी से नहीं मिलते हैं।

7.मछली शरीर में हुए कैल्शियम की कमी को ठीक करने का एक अच्छा आहार हैं। मछली की हड्डियों को खाया जा सकता है इसलिय यह कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं।

Calcium ki kami me aahar
मछली | अंडा

8.अंडे में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। रोज़ाना एक अंडा खाने से कैल्शियम तथा अन्य पोषक तत्व की कमी दूर हो सकती हैं।

कैल्शियम की जाँच (Test for calcium)

टोटल कैल्शियम टेस्ट द्वारा शरीर में कैल्शियम के स्तर को नापा जाता हैं। इस जाँच के दौरान शरीर से थोड़ी मात्रा में खून निकाला जाता है और जाँच किया जाता है, खून की जाँच में मिनटो में ही हो जाती हैं।

इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर को अपनी पूरी जानकारी देनी पड़ती है जैसे को सी दवाई का प्रयोग फिलहाल में कर रहे हैं।

डॉक्टर जाँच से पहले दवाई खाने से इसलिए मना करते है क्योंकि दवाइयों में विटामिन-D, कैल्शियम, मैग्नीशियम और लिथियम हो सकता हैं।

दवाइयों से शरीर में कैल्शियम की मात्रा बदल सकती है तथा इससे जाँच गलत हो सकती हैं।

इस जाँच में अगर खून में कैल्शियम की मात्रा 8.6 – 10.2 mg/dL के बीच हो तो वह साधारण स्तर हैं।

यूरिन सैंपल से भी कैल्शियम का स्तर नापा जा सकता हैं।

कैल्शियम और शरीर से मिलते अन्य सवाल 

प्रश्न1. हाथ – पैर सुन पड़ना कैल्शियम की कमी का कारण है या नहीं?

कैल्शियम न्यूरोट्रांसनेटर को सक्रिय करने में शरीर की सहायता करता है जिससे शरीर में कार्य संभव हो पाता है।

शरीर में कैल्शियम की कमी होने से न्यूरोट्रांसमीटर पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे कि शरीर में ऐठन, गुदगुदी,  हाथ-पैर आदि सुन पड़ने की समस्या हो सकती है।

प्रश्न2. कैल्शियम की कमी कैसे मानसिक बीमारियों का कारण बनता है?

जैसा कि हम जानते है कैल्शियम शरीर में सिग्नल पहुँचाने का काम करता है। शरीर में लंबे समय तक कैल्शियम कम रहने से यादास्त कमज़ोर होती है।

शरीर में कैल्शियम का स्तर कम होने से थकान, नींद न आना या पूरी नींद के बाद भी थकान महसूस होना जैसी दिक्कत हो सकती है।

इन्हीं समस्याओं से दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है और स्ट्रेस (stress), इनसोम्निया (Insomnia) जैसी मानसिक बीमारियां उत्पन होती है। 

प्रश्न3. कैल्शियम सिरदर्द का कारण होता है या नहीं?

किसी कारण से शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ने से सिरदर्द हो सकता है। शरीर में किसी भी रसायन का स्तर अचानक बढ़ने से सिर दर्द होता है। 

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कक्षा 12वी तक मैं खेल कूद में कुछ ही एक्टिव था। कॉलेज में जाने के बाद खेलना कूदना बहुत ही कम हो गया था और कॉलेज के दूसरे ही साल तक बिल्कुल ही बंद हो गया था।

बचपन से ही मुझे अलग-अलग चीज़े खाने का शौक है। वैसे तो बस मेरे को तीसरी कक्षा में पीलिया हुआ था इसके बाद कोई बड़ी बीमारी नहीं हुई।

कॉलेज के दूसरे साल के आखिर-आखिर तक मुझे टाइफाइड हो गया, कारण था वही मेरा शौक। 

एक ही हफ़्तों में टाइफाइड तो ठीक हो गया लेकिन शरीर में थकान, किसी चीज़ में मन नहीं लगना, पेट साफ नहीं होना, बालों का झड़ना, सिरदर्द जैसी समस्या होने लगी।

अपने बड़ो को यह समस्या बताया तो कहने लगे बीमारी के बाद ऐसा होना आम बात है। लेकिन बाद में यह समस्या ज़्यादा बढ़ गई तो मैंने डॉक्टर की सलाह लेना उचित समझा।

डॉक्टर ने भी यही बताया कि बीमारी के बाद ऐसा होता है लेकिन उहोंने मुझे ब्लड टेस्ट कराने की भी सलाह दी।

ब्लड टेस्ट कराया तो पता चला कैल्शियम की कमी है फिर मैंने रोज़ाना सलाह अनुसार कैल्शियम खाना और सुबह और शाम को कसरत करना शुरू किया ज़्यादा नहीं बस आधा घंटा, बस कुछ ही हफ़्तों में मैं बिकुल ही ठीक हो गया लेकिन सिर के बाल बस थोड़े कम हो गए।

 

 


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