खून की जांच क्या है? खून के जांच के 8 प्रकार? Blood test in hindi

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किसी भी बीमारी के दौरान शरीर में बहुत से बदलाव और तकलीफ़ उत्पन होती है, डॉक्टर इन्हीं तकलीफ़ो का पता कर और खून की जांच द्वारा बीमारी का पता करते है।

जानवरों और इंसानों में खून बहुत ही अहम भूमिका निभाता है, यह पूरे शरीर में ऑक्सीजन (oxygen) और पोषक तत्व पहुँचाने का काम करता है। खून शरीर के सभी हिस्सों में सफर करता है जिससे कि खून द्वारा यह पता चलता है कि कोन से अंग में तकलीफ़ है।

ज़्यादातर बीमारियों का लक्षण समान होते है, जिससे कि बीमारी का पता लगाना बहुत ही मुश्किल होता है। खून की जांच द्वारा किसी भी बीमारी का आसानी से पता किया जा सकता है, सभी बीमारियों के लिए अलग-अलग जांच मौजूद है।

खून की जांच (blood test) से कैल्शियम, हीमोग्लोबिन तथा शरीर के अन्य पोषक तत्वों की कमी का भी पता लगाया जा सकता है।

आगे पढ़कर जाने खून की जांच क्यों ज़रूरी है, इसके प्रकार और जानिए की इस दौरान किन बातों का हमें ध्यान रखना चाहिए।

खून की जांच (blood test) क्यों होती है?

खून के शुगर लेवल की जांच
ग्लूकोस टेस्ट

किसी भी बीमारी के बस लक्षण की पहचान कर डॉक्टर इलाज व दवाईयाँ नहीं लिखते है। ज़्यादातर बीमारी के लक्षण समान होते है।

डॉक्टर मरीज़ की तकलीफों को पूँछकर पहले बीमारी का पता करते है और फिर जॉच की सलाह है। खून, यूरिन व अन्य चीज़ों की जांच की जो रिपोर्ट बनी है, उसी आधार पर डॉक्टर इलाज करते व दवाईयाँ लिखते है।

जांच के बाद यह पृष्टिकरण हो जाता है कि यह व्यक्ति किस बीमारी से पीड़ित है।

ब्लड टेस्ट (खून की जांच) ज़रूरी क्यों है?

  • बॉडी फ्लूईड की जांच (Blood fluid test)

शरीर में बहुत से बॉडी फ्लूहेड व रसायन होते है, जो कि शरीर के लिए बहुत ही अहम होते है।

बॉडी फ्लूईड का स्तर शरीर में एक निश्चित मात्रा में होता है, इस मात्रा में थोड़ी सी भी बदलाव होने से शरीर में बीमारियां उत्पन होती है।

कम्पलीट बॉडी फ्लूईड की जांच से कैल्शियम, विटामिन, हीमोग्लोबिन आदि कि जांच कर बदलाव को संतुलित कर सकते है।

  • बीमारी का पृष्टिकरण (Test for disease)

बैक्टीरिया व वायरस से होने वाली बीमारी के लक्षण सामान्य बीमारी की ही तरह होते है, लेकिन जानलेवा होते है। यह बीमारी से शरीर में बहुत से अन्य बीमारी को भी जन्म देते है।

बीमार व्यक्ति के खून या यूरिन में बैक्टीरिया और वायरस के अंश होते है, जो कि जांच द्वारा पृष्टिकरण हो जाता है।

  • बीमारी पर रोक (Disease prevention)

बहुत सी बीमारी ऐसी होती है, जो कि शरीर में बहुत समय बाद पता चलती है जैसे की कैल्शियम की कमी, खून में आयरन की कमी आदि।

अगर समय – समय पर पूरे शरीर की नियमित जांच हो तब यह बीमारी कभी नहीं होगी, अगर हो भी गई तो इसका इलाज समय रहते सही से हो जायगा।

कैंसर जैसी बीमारी बहुत ही जानलेवा होती है, अगर इलाज में देरी की जाय तो इंसान की मौत भी हो सकती है। इसलिए शरीर की नियमित जांच बहुत ही ज़रूरी है, ताकि बीमारी को समय रहते इलाज किया जा सके और इसे बुरा रूप लेने से रोक सके।

  • ब्लड ट्रांसफ्यूज़न (Blood transfusion)

खून की जांच
रक्त दान (Blood donation)

खून की जांच ब्लूड ट्रान्सफ्यूज़न यानी एक शरीर से दूसरे में स्थानांतरण करते समय बहुत ही ज़रूरी होता है। ब्लड टेस्ट द्वारा, यह पता किया जाता है कि मरीज़ को  चढ़ने वाला खून हेल्दी है या नहीं।

किसी व्यक्ति को चढ़ने वाले खून में कोई भी बीमारी नहीं होनी चाहिए ताकि उस व्यक्ति पर खून दान करने वाले व्यक्ति की बीमारी न हो सके।

एड्स (AIDS), हेपाटेटिस (hepatitis) जैसी जानेवा बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के खून से यह बीमारियां फैल सकती है।

खून की जांच (Blood test) के प्रकार?

1.कम्पलीट ब्लड काउंट (Complete blood count)

इसे CPC जांच भी कहा जाता है। इस जांच में खून में मौजूद दस मुख्य चीज़ों की जांच होती है।

इस जांच में रेड ब्लड सेल्स (Red blood cells), वाईट ब्लड सेल्स (White blood cells) और प्लेटलेट्स (Platelets) की जांच होती है।

जानिए इनके असामान्य स्तर के होने से क्या-क्या समस्या हो सकती है।

  • विटामिन – B की कमी होना।
  • खून में आयरन की कमी होना।
  • दिल की समस्या होना।
  • कैंसर का मौजूद होना।

2.बेसिक मेटाबोलिक पैनल (Basic metabolic panel)

यह जांच शरीर में मौजूद कुछ अन्य मुख्य पदार्थों की जांच की जाती है। इस जांच के दौरान कम से कम 8 घंटे का उपवास रखना बहुत ही ज़रूरी है।

इस जांच में इलेक्ट्रोलाइट्स, कैल्शियम, ग्लूकोस, सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड, ब्लड यूरिया और क्रेटीन की जांच की जाती है।

3.कम्पलीट मेटाबोलिक पैनल (Complete metabolic panel)

यह जांच शरीर में शरीर में पाय जाने वाले प्रोटीन और लीवर के कार्य से जुड़े पदार्थों की जांच के लिए होता है।

जानिए CMP  में क्या-क्या जांच होता है?

  • टोटल प्रोटीन
  • एल्ब्यूमिन (Albumin)
  • एल्कलाइन फॉस्फेटेस (ALP)
  • एस्पार्टेट अमीनोट्रांसफेरेस (AST)
  • एलेनिन अमीनोट्रांसफेरेस (ALT)
  • बिलिरुबीन (Bilirubin)

4.लिपिड पैनल (Lipid panel)

इस जांच में 2 प्रकार के कोलेस्ट्रोल की जांच की जाती है, हाई डेन्सिटी कोलेस्ट्रॉल और लो-डेन्सिटी कोलेस्ट्रॉल।

इस जांच से पहले 8 घंटे का उपवास ज़रूरी है। लो-डेन्सिटी कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से नसों में प्लाक जमने लगता है और यह पतली होने लगती है।

5.थाइरोईड पैनल (Thyroid panel)

यह शरीर में थायरोक्सिन की मात्रा को जांच करने के लिए किया जाता है। थायरोक्सिन द्वार शरीर में बहुत से काम होते है।

इनमे बदलाव होना मतलब प्रोटीन की कमी होना, थाइरोइड होना, सेक्स हॉर्मोन का स्तर में कमी होना हो सकता है।

6.एंजाइम पैनल (Enzyme panel)

एंजाइम द्वारा शरीर में बहुत से काम सफल हो पाते है जैसे कि पाचन, सोखन इत्यादि। शरीर में किसी भी एंजाइम की कमी से शरीर में बहुत सी बीमारियां उत्पन हो सकती है।

इस प्रकार के खून की जांच में CPK1, CPK2, CPK3 और ट्रोपोनिन (Troponin) की जांच की जाती है।

7.यौन संचारित रोग की जांच (STD Test)

यह जांच मरीज़ के खून, यूरिन और इन्फेक्टेड टिशू से किया जाता है। इस जांच में 1 महीने जितने समय भी लग सकते है।

STD टेस्ट से क्लेमाईडिया (Chlamydia), साईफिलिस (Syphilis), गोनोरिया (Gonorrhea) और एड्स (AIDS) जैसे बीमारी का पता लगाया जाता है।

अस्पताल और लैब में होने वाले सामान्य जांच क्या है?

  • विडाल जांच (Widal test)

यह टाईफाइड की जांच करने की प्रक्रिया सन् 1896 में जॉर्जस फेरनेंड विडाल ने किया था।

इस बीमारी में बार – बार बुखार आता है और पाचन में भी समस्या होने लगती है जिसके कारण शरीर कमज़ोर होने लगता है।

इस दौरान पीड़ित व्यक्ति के शरीर से खून निकाला जाता है और उस खून को एक एन्टीबॉडीस के सीरम के साथ मिलाया जाता है, और बैक्टीरिया के अंश ढूँढे जाते है।

  • पीसीआर (PCR)

यह प्रक्रिया वायरल बीमारियों की जांच करने में बहुत ही सहायक है। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज़ के DNA के बहुत से नकल बनाय जाते है फिर इनमे अलग – अलग जांच होती है।

पी.सी.आर टेस्ट में शरीर में बने हुए एन्टीबॉडीस की नहीं बल्कि सीधा वायरल एन्टीजेन की तलाश करते है।

PCR प्रक्रिया - खून की जांच
PCR टेस्ट
  • एलिसा टेस्ट (ELISA test)

इस जांच का पूरा नाम एंजाइम लिंक्ड ईम्यूनोसोरबेन्ट एस्से (Enzyme linked immuno – sorbent assay) है।

  • पी.पी.बी.एस  टेस्ट (PPBS test)

इस प्रक्रिया में खून की जांच कर, शरीर में शुगर के स्तर को नापने के लिए किया जाता है। PPBS test का पूरा नाम पोस्ट प्रेडिनयल ब्लड शुगर (Post prandial blood sugar टेस्ट) है।

कुछ भी खाने के बाद शरीर में शुगर का लेवल थोड़ा बढ़ता है, शुगर के बढ़ने से शरीर में इन्सुलिन (insulin) भी बढ़ता है। PPBS जांच में इन्सुलिन के स्तर की जांच करके डायबिटीज जैसी बीमारी का पता किया जाता है।

  • बिलीरुबीन टेस्ट (Bilirubin test)

इस खून की जांच में शरीर में बिलीरुबीन के स्तर की जांच की जाती है। यह जांच जॉन्डिस, एनीमिया और लीवर की बीमारी की जांच में इस्तेमाल होता है।

यह जांच पथरी, हेपेटाईटिस और बाईल डक्ट की बीमारी का भी पता लगाने में भी काम आता है।

खून की जांच (Blood test) में किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

1.खून की जांच तथा अन्य जांच से पहले डॉक्टर (सैंपल इकट्ठा करने वाले) को अपनी पिछली बीमारी और इस्तेमाल कर रहे दवाइयों के बारे में ज़रूर बताय।

2.कोलेस्ट्रोल (cholesterol) और ग्लूकोस (glucose) की जांच में व्यक्ति को कम से कम 8 घंटे तक उपवास रखना ही पड़ता है। इसलिए डॉक्टर द्वारा बताय गए, जांच के पहले व बाद के नियमों का ज़रूर पालन करें।

3.जांच से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी ज़रूर पिये। शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड – प्रेशर गिर सकता है,  जिससे कि जांच के दौरान चक्कर आ सकता है।

4.अगर आपने जांच से पहले उपवास किया है, फिर जांच से पहले थोड़ा ज़रूर खाय – पिये ताकि कमज़ोरी या सरदर्द न हो सकें।

5.जांच से पहले चाय या कॉफी जैसी चीजें न पीये क्योंकि यह शरीर को डीहाइड्रेट कर शरीर का ब्लड – प्रेशर कम करता है। ब्लूड प्रेशर कम होने से थकान, चक्कर, सिर-दर्द जैसी समस्या उत्पन हो सकती है।

6.बहुत से लोगों को इंजेक्शन जैसी नुकीली चीज़ों से डर लगता है। घबराइये मत, जांच के दौरान  किसी अच्छी बातों के बारे में सोचे ताकि होने वाले दर्द का एहसास बिल्कुल न हो।

ज़रूर पढ़े

बीमारियों से बचने के लिए सालाना दो बार फुल बॉडी चेकअप ज़रूर कराय। इससे आप होने वाली बहुत से बीमारियों से बचे रहेंगे।

जांच के दौरान डॉक्टर के बताय गए आदेशों व नियमों का ज़रूर पालन करें। जांच के समय खून व यूरिन सैम्पल्स का ताज़ा होना बहुत ही ज़रूरी है।

अगर आपके कुछ अन्य सवाल है, तो हमे Comment सेक्शन में ज़रूर बताय।

 


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