पेट दर्द के 3 मुख्य कारण? पेट दर्द के लक्षण, प्रकार, इलाज और घरेलू उपचार (Stomach pain in hindi)

मेथी खाने के फायदे - पीरियड्स में होने वाले दर्द को कम करना
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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग इतना व्यस्त हो गए है कि खुद का ध्यान रखना ही भूल जा रहे है। लोग व्यस्तता के कारण न ठीक से खाना खा रहे है और न ही पर्याप्त नींद ले रहें है, इसके कारण शारीरिक और मानसिक बीमारी का खतरा बढ़ता जाता है। इन्हीं बीमारियों में एक बीमारी है, पेट दर्द। पेट दर्द होने के ज़्यादातर कारण सामान्य होते है, लेकिन कुछ कारण जानलेवा भी हो सकते है। आगे पढ़कर जाने पेट दर्द के कारण (causes of stomach pain in hindi), पेट दर्द के लक्षण (symptoms of stomach pain in hindi), इलाज और कुछ घरेलू उपाय (Home remedies for stomach pain in hindi).

घर में रखी बहुत सी चीज़ों से पेट दर्द ज़रूर ठीक हो जाता है लेकिन यह चीज़ नुकसान भी पहुँचा सकती है। ज़्यादा जानने के लिए FAQs ज़रूर पढ़े।

पेट दर्द के प्रकार (Types of stomach pain in hindi)

पेट दर्द को दर्द के समय के आधार पर तीन हिस्सों में बाँटा गया है।

  • तीव्र पेट दर्द (Acute stomach pain)
  • स्थायी पेट दर्द (Chronic stomach pain)
  • समय के साथ बढ़ने वाला पेट दर्द (Progressive stomach pain)

1.तीव्र पेट दर्द (Acute stomach pain)

इस प्रकार का दर्द पेट में कुछ समय या फिर कुछ दिन तक रहते सकते है, इस प्रकार के पेट दर्द का ज़्यादातर कारण कब्ज़, अत्यधिक भोजन, नस चढ़ना, गैस बनना ही होता है।

यह पेट दर्द नुकसानदायक नहीं होते लेकिन ज़्यादा और  बार – बार हो, तो डॉक्टर की सलाह बहुत ही ज़रूर है।

अन्य कारण : –

  • निमोनिया (Pneumonia)
  • अपेंडीसाईटिस (Appendicitis)
  • कोलनगाईटिस
  • सिसटाईटिस (Cistitis)
  • डूवोदेनिटिस (Duodenitis)

2.स्थायी पेट दर्द (Chronic stomach pain)

इस प्रकार के पेट दर्द कुछ हफ़्ते या फिर कुछ महीनों तक रह सकते है। इस पेट दर्द का कोई गंभीर कारण हो सकता है। फूड पॉइज़निंग, पेट या आंतो में इन्फेक्शन, किडनी तथा पेट के आस – पास मौजूद अन्य अंग में खराबी हो सकता है।

स्थायी पेट दर्द में लक्षण समझकर इलाज करना बहुत ही ज़रूरी होता है, इलाज न करने पर जान का खतरा भी हो सकता है।

अन्य कारण : –

  • अनजीना (Angina)
  • पित्ताशय में पथरी (Gallstones)
  • गैस्ट्राइटिस (Gastritis)
  • हर्निया (Hernia)
  • ओवेरियन सिस्ट (Ovarian cyst)
  • सिक्कल सेल एनीमिया (Sickle cell anemia)

3.समय के साथ बढ़ने वाला पेट दर्द (Progressive stomach pain)

इस प्रकार के पेट दर्द समय के साथ बत्तर होने लगते है, इस दर्द के बहुत से जानलेवा कारण हो सकते है।

अन्य कारण : –

  • कैंसर (Cancer)
  • क्रोह्न बीमारी (Crohn’s disease)
  • स्प्लीन का बढ़ना (Enlarged spleen)
  • हेपाटायटिस (Hepatitis)
  • यूरेमिया (Uremia)
  • गुप्तांग में मवाद भरना

पेट दर्द होने के लक्षण (Symptoms of stomach pain in hindi)

पेट दर्द सामान्य होता है, लेकिन यह बार – बार होने लगे तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है। पेट दर्द होने के बहुत से कारण होते है, लेकिन सबके लक्षण एक समान ही होते है। पेट दर्द की जगह पहचानकर आप इसके कारण का अनुमान एक हद तक लगा सकते है।

आगे पढ़कर जाने पेट दर्द के मुख्य लक्षण (main reasons of stomach pain in hindi)

  1. रुक – रुक कर पेट या सीने (stomach or chest)  के आसपास दर्द होना।
  2. पेट में तेज जलन होना।
  3. शरीर के बीच के हिस्सों में जकड़न और चुभन होना।
  4. पेट फूलना व अत्यधिक गैस बनना।
  5. पेट से गुड़गुड़ की आवाज़ अलना।
  6. खट्टी डकार (sour burping) बार – बार आना।
  7. जी मिचलना व उल्टी (vomiting) होना।
  8. हल्का बुखार (fever) आना।
  9. दस्त लगना (Loose motion).
  10. पेशाब करते समय जलन व दर्द होना।

ज़्यादातर लोगों में पेट दर्द, पेशाब करते समय जलन और दर्द का कारण पथरी होता है।

पेट दर्द के कारण (Causes of stomach pain in hindi)

ज़्यादातर समय पेट दर्द होने के कारण बदहज़मी (acidity) और गैस होता है। पेट में दर्द होने का कारण सामान्य या फिर कोई बीमारी भी हो सकती है।

पेट के आस-पास वाले हिस्सों में हृदय, किडनी, लिवर, छोटी-आंत, बड़ी-आंत जैसे मुख्य अंग मौजूद होते है, इनमे खराबी आने से भी पेट दर्द हो सकता है। पेट में दर्द होने की जगह की पहचानकर आप पेट दर्द का कारण पता कर सकते है।

पेट दर्द होने का सामान्य कारण (Normal causes of stomach pain in hindi)

  • मानसिक तनाव (Mental stress)

तनाव में रहने से शरीर में कार्टिसोल (cartisol) उत्पन होता है। खून में कार्टिसोल की मात्रा बढ़ने से एसिडिटी, पेट में खिंचाव, कब्ज़, दस्त, जैसे बीमारियां होने लगती है।

  • बदहज़मी और गैस (Acidity and gas)

बदहज़मी और गैस पेट दर्द का एक बहुत ही मुख्य कारण है, इस अवस्था में पेट में अत्यधिक एसिड हो जाता है जिससे कि पेट में जलन और खट्टी डकार आने लागतो है।

  • कब्ज़ (Constipation)

पेट से मल का न निकलना कब्ज़ कहलाता है, यह भी पेट दर्द का एक मुख्य कारण है। कब्ज़ का कारण डीहाइड्रेशन (dehydration), फाईबर की कमी, शारीरिक श्रम की कमी (physical inactivity) हो सकती है।

  • उल्टी (Vomiting)

उल्टी करने से पेट के आस – पास की त्वचा अचानक से खिंचती है और अधपचा खाना बाहर आता है, जिसके कारण पेट दर्द हो सकता है।

  • एसिड रिफ्लक्स (Acid reflux)

इस बीमारी को गेस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डीसीस (GERD) भी कहा जाता है। इस बीमारी में पेट से निकला एसिड और बाईल जूस खाने की नली को नुकसान पहुँचता है जिससे कि सीने व पेट में जलन होने लगता है।

  • पेट में फ्लू (Gastrienteritis)

ज़्यादातर पेट के फ्लू (stomach flu) का कारण वायरस होते है। इस बीमारी के दौरान दस्त, उल्टी, चक्कर, नस खिचना जैसे लक्षण देखने को मिल सकते है।

यह इन्फेक्टेड व्यक्ति के खाने व पानी से फैल सकता है।

  • पित्ताशय में पथरी (Gall-stones)

इस बीमारी में कलेजे (liver) के नीचे मौजूद पित्ताशय (gall bladder) में पाचन में काम आने वाले रसायन जमने से होती है।

पित्त पथरी के लक्षण पहचानना मुश्किल होता है, लेकिन इस दौरान उल्टी, पेट दर्द, मतली देखने को मिल सकता है।

  • किडनी में पथरी (Kidney stones)

यह बीमारी किडनी में नमक और तरल पदार्थों जमने के कारण होती है। पेट में असहनीय दर्द, पेशाब करते समय तेज़ जलन होना और खून निकलना इसके मुख्य लक्षण है।

महिलाओं में होने वाला पेट दर्द (Causes of Stomach pain in women) hindi

  • मेन्सट्रल क्रेपम्स (Menstral cramps)

पीरियड्स (periods) के दौरान गर्वशय (uterus) में फैलाव होता है, जिसके कारण पेट या पेट के आस – पास वाले हिस्सों में दर्द व ऐठन होता है।

  • गर्वावस्था (Pregnancy)

प्रेगनेंसी के समय गर्वाशय (uterus) में अत्यधिक फैलाव होने लगता है, जिसके कारण शुरुआती महीनों में पेट दर्द हो सकता है।

अगर गर्वावस्था के समय पेट दर्द बहुत ही ज़्यादा होने लगे तो डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।

  • ओवेरियन सिस्ट (Ovarian cancer and cyst)

महिलाओं में दो अंडाशय (ovary) मौजूद होते है। अगर किसी ओवरी में पानी जमकर ठोस हो जाता, तब इस अवस्था को ओवेरियन सिस्ट कहते है, यह महिलाओं में पेट दर्द का कारण हो सकता है।

ज़्यादातर ओवेरियन सिस्ट बिना इलाज के भी कुछ ही महीनों में ठीक हो जाते है, लेकिन डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

खाने के सेवन से होने वाला पेट दर्द (How food can cause stomach pain in hindi)

  • फ़ूड एलर्जी (Food allergy)

खाने के एलर्जी से अत्यधिक गैस, पेट दर्द, त्वचा में खुजली जैसे लक्षण देखने को मिलते है, इसलिए एलर्जी – कारक खाने को पहचानना और दूर रहना जरूरी है।

  • फ़ूड पॉइज़निंग (Food poisoning)

खाने में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और ज़हरीले पदार्थों के कारण फ़ूड पॉइज़निंग होता है। सर दर्द, पेट दर्द, दस्त, कमज़ोरी, डीहाइड्रेशन और उल्टी इसके आम लक्षण है।

  • लैक्टोस ईनटोलरेंस (Lactose intolerance)

दूध या दूध से बने चीज़ों में लैक्टोस (lactose) शुगर मौजूद होता है। दूध में मौजूद लैक्टोस को न पचा पाना लैक्टोस ईनटोलरेंस कहलाता है। पेट दर्द, दस्त, ऐठन और उल्टी इसके आम लक्षण है।

अंगो में खराबी से होने वाला पेट दर्द (Causes of stomach pain by disfunction of organs in hindi)

  • किडनी में इन्फेक्शन (Kidney infection)

  • आंतो में इन्फेक्शन (Intestine infection)

  • पैनक्रिया में जलन (Pancreatitis)

  • मूत्राशय में इन्फेक्शन (Cholecsystitis)

पेट दर्द के अन्य कारण (Other reasons of stomach pain in hindi)

  • हर्निया (Hernia)

पेट और आंतों में छेद व सूजन होना हर्निया कहलाता है। इस बीमारी के लक्षण पहचानना बहुत ही मुश्किल है।

पेट व पेट के निचले हिस्सों में दर्द व सूजन होना और दर्द के कारण बेचैनी होना, इसके लक्षण हो सकते है।

  • गैस्ट्रोएस्ट्रोफेगल रिफ्लक्स डिसीस (GERD)

इस बीमारी में पाचन के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायन द्वारा खाने की नली को नुकसान पहुँचता है। खाते समय सीने व पेट में जलन होना इसके सामान्य लक्षण है।

  • कैंसर (Cancer)

कैंसर की बीमारी किसी को भी हो सकती है, इसके लक्षण बहुत ही मुश्किल से ही दिखाई देते है। शरीर के किसी हिस्सें में बेवजह दर्द होना, कमज़ोरी होना और शरीर में गाँठ बांधना इस बीमारी के लक्षण हो सकते है।

  • अपेंडीसाईटिस (Appendicitis)

छोटे आंत के शुरुआती हिस्सों में अपेंडिक्स (appendix) मौजूद होता है, और यह किसी काम का नहीं होता है।अपेंडिक्स में सूजन आने से पेट दर्द होता है और यह बीमारी जानलेवा नहीं होती है।

पेट दर्द से कैसे बचें (How to prevent stomach pain in hindi)

बीमारियों से बचा नहीं जा सकता है, लेकिन इनके होने का खतरा ज़रूर कम किया जा सकता है। जानिए पेट दर्द की तकलीफों से कैसे बचें रहें।

1.खाने-पीने पर विशेष ध्यान

  • भर पेट व ज़्यादा खाना कभी न खाय।
  • देर से पचने वाली चीज़ों का सेवन कम से कम करें।
  • तली हुई चीज़े ज़्यादा न खाय।
  • मसाले से बनी चीज़े रोज़ाना न खाय।
  • भरपूर मात्रा में पानी पिये।
  • खाना खाते समय या फिर खाना खाने के बाद पानी न पिये, कुछ समय इंतज़ार करके ही पानी पिये।
  • जिस खाने से आपको एलर्जी है, उसे पहचाने और दूर रहे।
  • ठंडे चावल तथा अन्य बासी चीज़ों का सेवन न करे, या फिर कम से कम करें।

2.पर्याप्त नींद

  • रोज़ाना रात को 6 – 8 घंटे की नींद अवस्य ले।
  • लंबे समय तक किसी जगह बैठे या खड़े न रहे।
  • काम के वक़्त कुछ समय का ब्रेक ज़रूर ले।
  • सीधा पेट के बल न सोय।
  • खाना खाने के बाद कभी न लेटे।
  • सोने से पहले पानी न पिये बल्कि सोने से कुछ समय पहले पानी पीने से बहुत फायदा होता है।

3.रोज़ाना कसरत और योग

  • रोज़ाना कम से कम 10,000 कदम ज़रूर चले।
  • हफ़्ते में तीन दिन कसरत ज़रूर करें।
  • रोज़ाना सुबह व शाम को प्राणायाम करें।
  • शरीर में ज़्यादा चर्बी जमने न दें।
  • खाना खाने के बाद पदमासन ज़रूर करें।

4.गर्म पानी पिये

  • गर्म पानी स्वास्थ के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। रोज़ाना गर्म का सेवन करने से से पेट दर्द, सिर दर्द और कब्ज़ जैसी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
  • कुनकुना व गर्म पानी प्यास को बढ़ाता है और शरीर में  नमी (moisture) बनाय रखने में मदद करता है।
  • गर्म पानी आंतो में से जमे हुए मल को साफ़ कर पाचन सकती बढ़ाता है।

5.मानसिक तनाव से दूर रहे

  • यह तनाव शरीर को अंदर से खोखला करने  लगता है।ज़्यादा समय तक मानसिक तनाव में रहने से शरीर में बहुत से नकारात्मक प्रभाव होते है, जिससे कि शरीर कमज़ोरी होने लगता है।
  • मानसिक तनाव के बहुत से कारण होते है इसलिए इससे बचने की कोशिश करें और स्ट्रेस – एंगर मैनेजमेंट (Stress or anger management) ज़रूर सीखे।

6.एलर्जी – कारक चीज़ों को पहचाने और दूर रहें

  • एलर्जी पेट दर्द, सिर दर्द, अस्तमा जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है, इसलिए एलर्जी – कारक  चीज़ों से दूर रहना बहुत ही ज़रूरी है।
  • एलर्जी का कारण कोई तेज़ खुशबू, खाने की चीज़ें, फूल के बीज, धूल, मिट्टी इत्यादि हो सकते है।

7.मेडिकल चेकअप

  • सालाना 2 – 3 बार मेडिकल चेकअप कराना बहुत ही ज़रूरी होता है। चेकअप से आप के शरीर में हुए बदलाव की जांच कर बहुत सी साधारण से लेकर जानलेवा बीमारी तक का पता किया जा सकता है।
  • फुल बॉडी चेकअप (full body checkup) द्वारा पोषक तत्वों की कमी की जांच कर, इन्हें संतुलित किया जा सकता है, जिससे कि बहुत से बीमारियां थम सकती है।

पेट दर्द इलाज (Treatment of stomach pain in hindi)

ज़्यादातर पेट दर्द का कारण बदहज़मी, एसिडिटी, गैस, कब्ज़ जैसी पाचन की बीमारियां हो सकती है, जिनको की आप आसानी से ठीक कर सकते है।

सामान्य रूप से जो पेट दर्द होता है, उसके लिए क्या करे?

एंटासिड पिये (Use of antacid for stomach pain in hindi)

चबाया हुआ खाना पेट में जाता है, जहाँ खाना जूस के साथ मिलकर वह खाना पचाने लायक बनता है।

किसी बीमारी या ज़्यादा खाना खाने पेट में अत्यधिक एसिड बनने लगता है, जिसके कारण जलन व पेट दर्द होता है। एंटासिड पेट में घुलकर जल्द ही दर्द व जलन को ठीक करता है।

नींबू या बेकिंग सोडा (Use of lemon or baking soda for stomach pain in hindi) 

एसिडिटी (acidity) की समस्या में नींबू का रस और बेकिंग सोडा (खाने वाला सोडा) फायदेमंद साबित हो सकता है। नींबू में मौजूद एसिड पेट के एसिड से मिलकर  खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है।

इस्तेमाल : –

कुनकुने पानी में नींबू का रस निचोड़ लें और पिये, मात्रा पर विशेष ध्यान देना बहुत ही ज़रूरी है।

एक कप पानी में एक छोटा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर पिये अगर आपने किसी दवाई का इस्तेमाल पहले ही किया है, तो दो घंटे बाद ही इसका इस्तेमाल करे।

गर्म पानी से नहाय या फिर हॉट बैग (Use of hot water for stomach pain in hindi)

मेन्सट्रल क्रैमप्स और पेट खराब होने पर हॉट वाटर बैग (Hot water bag) बहुत ही सहायक साबित हो सकता है। पानी की गर्मी नसों को शांत कर दर्द कम कर उसे ठीक करती है।

गर्म पानी से नहाने से शरीर को आराम मिलता है और पूरे शरीर के रक्त संचार में सुधार आता है। यह शरीर के दर्द से आराम पाने का बहुत ही सरल तरीका है।

इस्तेमाल : –

हॉट बैग (hot bag) को सीधा किसी शरीर के हिस्से में न रखें क्योंकि यह शरीर के ज़्यादा गर्म हो सकता जिससे कि त्वचा जल सकती है।

हॉट बैग को हमेशा किसी टॉवेल या किसी मोठे कपड़े से लपेटकर ही इस्तेमाल करे, कपड़े के ज़्यादा गर्म होने पर हॉट बैग हटा ले और इस्तेमाल करे।

सफ़ेद चावल या केला (What you have to eat white rice or banana for stomach pain in hindi) 

सफ़ेद चावल दस्त के समय में एक बहुत ही अच्छा विकल्प है। सफ़ेद चावल में स्टार्च और थोड़ी मात्रा में फाईबर होता है, जिसको आसानी से पचाया जा सकता है। यह मल (stools) को बाँधकर दस्त को समस्या कम करता है।

केलो में बहुत से पोषक तत्व होते है और इसे आसानी सेनपचाय जा सकता है, यह मल को बाँधता है और दस्त और उल्टी से होने वाले पोषण की कमी को पूरी करता है।

ऐलोवेरा जूस पिये (Use of aloe vera juice for stomach pain in hindi)

घृतकुमारी अथार्थ एलोवेरा पूरे शरीर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

एलोवेरा में बहुत से डाईजेस्टिव एंजाइम्स (digestive enzymes) होते जो कि पाचन शक्ति को मजबूत कर इम्युनिटी (immunity) बढ़ाता है, पेट और आंतों की सतह को भी चिकना बनाता, जिससे कि पेट दर्द की समस्या कम हो जाती है।

इस्तेमाल : –

एलोवेरा के मुलायम हिस्सा यानी लेटेक्स को साबुत न खाय, ऐसे खाने से पेट की समस्या उत्पन हो सकती है।

एलोवेरा से केवल सफ़ेद लेटेक्स ही निकले और किसी फ्रूट जूस के साथ आनंद ले।

किस प्रकार के पेट दर्द में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है?

पेट दर्द सामान्य होता है, लेकिन यह दर्द ज़्यादा, लंबे समय तक  और  बार – बार होने लगे, तब  डॉक्टर की  सलाह ज़रूरी है। डॉक्टर की सलाह व जांच द्वारा जानिए पेट में होने वाला दर्द सामान्य है, या फिर कोई गंभीर बीमारी की शुरुआत।

पेट दर्द के सामान्य लक्षण (Symptoms of stomach pain in hindi) : –

  1. बुखार (fever)
  2. बार – बार उल्टी (frequent vomiting) होना।
  3. डीहाइड्रेशन (dehydration)
  4. पेट साफ न होना।
  5. पेशाब करते समय दर्द होना।

पेट दर्द गंभीर कब है (Severe symptoms of stomach pain in hindi) : –

  1. सांस लेते समय तकलीफ़ (Breathing problem)  होना।
  2. उल्टी के साथ खून (blood vomiting) बाहर आना।
  3. दस्त (Diarrhoea) लगना और मल के साथ खून बाहर आना।
  4. पेट में सूजन (stomach swelling) होना।
  5. त्वचा पीली (yellow skin) पड़ना।

पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार (Home remedies for stomach pain in hindi)

बार – बार दवाइयों के इस्तेमाल से रहे दूर, जानिए कैसे आप अपने रसोई में रखे चीज़ों से कर सकते है, पेट दर्द का जड़ से इलाज।

Remedies for stomach pain in hindi

1.पुदीना और पेट दर्द (Use of mint for stomach pain in hindi)

अपच और पेट में जलन से छुटकारा पाने के लिए पुदीना की एक चॉकलेट या फिर पुदीने की चाय पीना अच्छा उपाय हो सकता है। पुदीने में शरीर को ठंडक पहुँचाने वाले पदार्थ मौजूद होते है, जो की पेट की सतह को शांत कर जलन को कम करते है।

GERD की बीमारी में पुदीने का इस्तेमाल करना बीमारी बत्तर  हो सकती है।

2.अदरक का रस (Use ginger for stomach pain in hindi)

अदरक बहुत सी बीमारियों के ईलाज में सदियों से काम में आ रहा है। अदरक पेट सख्त होने, एसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स तथा पेट की नस खिंचने जैसी समस्याओं के लिए बहुत ही सहायक है।

अदरक में जिंजेरोल और शैगलोल भरपूर मात्रा में मौजूद होते है जिनमे एन्टीइंफ्लेमेटरी, एन्टीफंगल, एन्टीबैक्टीरियल और एन्टी डिप्रेसेंट गुण होता है।

इसलिए यह पेटदर्द, एसिडिटी तथा सर्दी-खांसी से जुड़ी समस्या में बहुत ही असरदार होते है।

3.लहसुन का रस (Use of garlic for stomach pain in hindi )

भोजन के साथ या बाद में लहसुन ग्रहण करना स्वास्थ को बहुत फ़ायदा पहुँचा सकता है।भोजन के साथ लहसुन की 3 से 4 कली खाने से पेट दर्द, गैस, उल्टी, कब्ज़ की समस्या बहुत ही कम हो जाती है।

यह दस्त की समस्या कम करता है, भूक बढ़ता है और पूरे पाचन को बीमारियों से भी दूर रखता है।

लहसुन में मौजूद तरल पदार्थ लिवर और ब्लाडर की कार्य क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है।

4.नींबू पानी (Use of lemon for stomach pain in hindi)

नींबू पानी पेट की समस्या में बहुत ही अच्छा उपचार है। नींबू vitamin-C, vitamin-B6, आयरन और मैग्नीशियम का बहुत ही अच्छा श्रोत है।

गुनगुने पानी में नींबू का रस डालकर पीने से पेट की बहुत सी बीमारियां दूर हो सकती है जैसे कि गैस, पेट दर्द, कब्ज़, पाचन अंगों की समस्या, पेशाब की समस्या आदि।

ज़्यादा खाने के कारण पेट दर्द हो रहा है तब एक ग्लास गुनगुने पानी में नींबू की कुछ बूंदे डाले और पेट की दर्द और जलन से छुटकारा पाय।

5.अजवाईन (Use oregano for stomach pain in hindi)

रिसर्च द्वारा यह पता किया गया है कि अजवाईन के पत्ते पेट दर्द के लिए बहुत ही सहायक है। ओरेगैनो का इस्तेमाल करते समय मात्रा में ध्यान देना बहुत ही आवश्यक होता है।

अजवाईन में बहुत ही ताकतवर एन्टीबैक्टीरियल पदार्थ मौजूद होते है जो कि बहुत से बैक्टीरिया को खत्म कर पेट की बीमारियों से बचाता है।

अजवाईन E. coli जैसे आंतो के कीटाणुओं को भी खत्म करने में भी कारगर है। यह कीटाणु बहुत सी पेट की बीमारियों का कारण बनता।

6.बेकिंग सोडा (Use of baking for stomach pain in hindi)

अगर पेट में कोई खाना पच नहीं पाता है तब पेट ज़्यादा मात्रा में खाना पचाने के लिए एसिड बनाने लगता है जिससे कि पेट भरा-भरा सा लगता है और पेट में जलन महसूस होने लगता है।

बेकिंग सोडा यानी खाने वाला सोडा पेट में जलन, एसिडिटी व पेट के अलसर जैसी समस्या में कुछ समय तक राहत देने में कारगर है।

7.काला नमक (Use black salt for stomach pain in hindi)

सामान्य पेट दर्द के लिए काला नमक इस्तेमाल करना एक  अच्छा उपाय है। काले नमक में अलकलाईन गुण होते जो कि पेट में ज़्यादा मात्रा में मौजूद एसिड को कम करता है।

काले नमक में बहुत से तरल पदार्थ होते है जो एसिड से हुए नुक्सान को ठीक करता है और तरल पदार्थों की कमी को भी पूरी करता है।

काला नमक गैस और कब्ज़ की कमी को दूर करता है जो कि पेट दर्द की समस्या का मुख्य कारण है।

8.गिलोई का रस (Use of giloy juice for stomach pain & other problems in hindi)

यह बहुत सी शारीरिक बीमारियों को ठीक करने का बहुत ही असरदार उपाय है। अगर आप भरपूर मात्रा में रोज़ाना गिलोई के जूस का सेवन करते है आप बहुत सी खतरनाक बीमारियों से दूर रह सकते है। जानिए कैसे?

गिलोई का रस, पत्ते और जड़ बहुत ही असरदार इम्यूनोबूस्टर (immune-booster) साबित हुए है।

यह पाचन संबंधित बीमारी जैसे कि कब्ज़, अपच, गैस, पेट फूलना आदि से भी लड़ने में सहायक है। गिलोई कैंसर तथा लकवा (paralysis) संभंधित बीमारियों से भी लड़ने में कारगर है।

जैसा कि हम जानते हैं, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और कोविड इन्फेक्शन में बुखार लंबे समय तक रहता है और बार-बार आता है। गिलोई का रस इस प्रकार के बुखार से भी लड़ने में कारगर है।

9.दालचीनी (Use of cinnamom for stomach pain in hindi)

दालचीनी में मौजूद एन्टीवायरल, एन्टीफंगल और एन्टीबैक्टीरियल गुण शरीर में होने वाली बहुत सी बीमारियों को कम व ठीक कर सकता है। यह पेट में मौजूद बहुत सी हानिकारक कीटाणुओं तथा वायरस को पेट व आंतो से साफ करके शरीर को बीमारियों से मुक्त करता है।

दालचीनी का प्रयोग आप खाने में कर सकते है या फिर चाय में डालकर पी सकते है।

10.मौसमी फल (Use of seasonal fruits that relieves from stomach pain)

जो फल किसी खास मौसम में ही उगते है उन्हें मौसमी फल कहा जाता है। गर्मी के मौसम में उगने वाले फल गर्मी में होने वाली बीमारियों से लड़ने में सक्षम होते है वैसे ही ठंड में उगने वाले फल ठंड में होने वाली बीमारियों से लड़ने में सक्षम होते है।

पपीता, अमरूद, केला, सेब, कटहल यह ऐसे फल है जो कि पेट और पाचन की समस्या दूर करते है।

पेट दर्द के लिए योग और कसरत (Yoga and exercise for stomach pain in hindi)

योग करते समय एक्सपर्ट्स (experts) की सलाह बहुत ही ज़रूरी है, बिना किसी सलाह के कुछ योग दोहरहने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

कसरत (How exercise prevents stomach pain in hindi?)

  • रोज़ाना कम से कम 10,000 कदम चले।
  • घुटने सीधे करके और झुककर ज़मीन छूने की कोशिश करें।
  • पदमासन की अवस्था में दोनों हाथों को पीछे  रखकर, सिर से जमीन छूने की कोशिश करें।
  • पाँच से दस बार लंबी छलांग लगाय।
  • उच्चा कूदे या फिर रस्सी – कूद करें।
  • अपने से 1/3 वज़न रोज़ाना उठाय।

योग (How Yoga prevents stomach pain in hindi)

कोई भी आसान करते समय किसी की सलाह तथा आसन के फ़ायदे और नुकसान ज़रूर जाने। क्योंकि सभी आसन शरीर के अलग-अलग हिस्सों से काम करता है यदि आप के उस हिस्से में कोई समस्या है तब वह समस्या ज़्यादि बढ़ सकती है।

योग व आसन करते समय ब्लड प्रेशर, शुगर, और हड्डियों में फ्रैक्चर वाले मरीज़ बहुत ही ज़्यादा ध्यान रखें।

  • गैस और कब्ज़ के लिए योग

1.पदमासन (Padmasana)

Yoga for stomach pain (in hindi)
Padmasan (पदमासन)

यह आसन शरीर को शांत कर उसे मजबूत बनाने में मदद करता है। स्ट्रेस, मेन्सट्रल पेन, प्रेगनेंसी में यह बहुत ही फायदेमंद देखा गया है। पदमासन शरीर के पोस्चर को सही कर दर्द को कम करता है।

2.हलासन (Halasana)

Yoga for stomach pain (in hindi)
Halasan (हलासन)

यह आसन गर्दन, कंधे, पेट और रीढ़ हड्डी को मजबूत करता है। कब्ज़ और गैस की बीमारी में भी यह आसन बहुत ही सहायक है।

3.अर्ध – मतस्येन्द्रासन (Ardh – matsendrasana)

अर्ध - मत्स्येन्द्रासन (Ardhmatsyendrasan)
अर्ध – मत्स्येन्द्रासन (Ardhmatsyendrasan)

4.चक्रासन (chakrasana or ardh-chakrasana)

चक्रासन तथा अर्ध-चक्रासन नाभी के नीचे के हिस्सों में खून का संचार बढ़ाता है।

यह आसन पूरे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है, इन आसन द्वारा पेट और कमर से जुड़ी तकलीफ़े बहुत ही कम हो जाती है।

  • भोजन के बाद योग (Yoga after a meal)

1.वज्रासन (Vaajrasana)

Yoga for the prevention of stomach pain (in hindi)
वज्रासन (wajrasan)

यह आसन भोजन ग्रहण करने के बाद किया जाता है। यह आसन शरीर के बीच के हिस्सों में खून का संचार बढ़ता है जिससे शरीर के मध्यम हिस्से में मौजूद ऑर्गन्स की काम करने की क्षमता बढ़ती है।

यह आसन पेट, आंत, पैन्क्रिया तथा सेक्सुअल ऑर्गन के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हुआ है। यह आसन रोज़ाना भोजन करने के बाद करने से कब्ज़, गैस और पेट दर्द जैसी समस्याओं को कम करने में कारगर है।

2.गौमुखासन (Gomukhasana)

गौमुखासन पेट, आंतो तथा रेक्टम (rectum) को खोलने में मदद करता है जिससे कि पाचन संबंधित बीमारी जैसे कि कब्ज़,  तथा गैस की समस्या

  • प्राणायाम

प्राणायाम (Pranayam)
प्राणायाम (Pranayam)

प्राणायाम सभी प्रकार की शारीरिक तथा मानसिक विकार व गंदगी को साफ करने में मदद करता है। जिससे कि शरीर की काम करने की शक्ति बढ़ती है और शरीर सभी प्रकार की तनाव से दूर रहता है और शरीर स्वस्थ रहता है।

FAQs – पेट दर्द से जुड़े अन्य सवाल (stomach pain in hindi)

1.ज़्यादा भार उठाने से पेट दर्द होता है या नहीं?

अचानक ज़्यादा भार उठाने से शरीर के बीच के हिस्सों में  ऐठन आ सकता है, जिसको की ठीक होने में एक से दो हफ़्ते भी लग सकते है।

जिम व खेल खेलने से पहले शरीर को गर्म करना ज़रूरी होता है इससे फ्रैक्चर व सूजन का खतरा बहुत ही कम हो जाता है। पानी में तैरने से पहले कुछ न खायें और एक हल्का शावर ज़रूर लें।

2.कब्ज़ (constipation) कैसे पेट दर्द का कारण बनता है?

खाया हुआ खाना पेट से होकर सीधा आंतो (intestine)  में जाता है। पेट में खाना अनेक रसायनों से मिलने के बाद वह खाना मल (stools) बन जाता है। आंतो में मल का पुनः पानी और पोषक तत्व का सोखना चलता है।

ज़्यादा समय तक आंतो में मल रहने से, मल से ज़्यादा मात्रा में पानी का सोखन हो जाता है, जिसके कारण मल ठोस होने लगता है। मल के ठोस होने से आंतों को नुकसान होता है, जिसके कारण पेट दर्द भी होता है।

3.खट्टी चीज़े खाने से पेट दर्द होता है या नहीं?

खट्टी चीज़ों में भरपूर मात्रा में विटामिन-C और डीएट्री फाईबर मौजूद होता है जो कि शरीर से मैल निकालने में मदद करता है। कुछ व्यक्तियों को नींबू तथा अन्य खट्टी चीज़े खाने से पेट में दर्द व जलन होता है।

4.गलत पोस्चर (bad posture) कैसे पेट और अन्य दर्द का कारण बनता है?

लंबे समय तक गलत पोस्चर में बैठने से शरीर पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। गलत पोस्चर में लंबे समय तक बैठने, सोने तथा अन्य काम करने से दर्द, पाचन समस्या तथा रीढ़ की बीमारी से झूझना पैड सकता है।

रीढ़ की हड्डियों में समस्या होने से अत्यधिक कमर दर्द, हड्डियओं में गैप, लकवा तथा अन्य न्युरॉन की बीमारी हो सकती है।

5.टाईफाइड (typhoid) और पेट दर्द से जुड़ी बातें?

टाईफाइड साल्मोनेला टायफी (Salmonella typhi) नाम के बैक्टीरिया द्वारा होता है। यह बैक्टीरिया सीधा इंसानों के पाचन तंत्र में हमला कर उसे कमज़ोर बनाता है।

इस बीमारी में पेट दर्द, पेट मे जलन, बुखार का बार-बार आना, कब्ज़ तथा दस्त इसके आम लक्षण है। लंबे समय तक इसका इलाज न होने से पेट और आंतों में छाले पड़ जाते है जिससे पेट की नसें खिंचती है और पेट की जलन असहनीय हो जाती है।

ज़रूर पढ़े

पेट दर्द के ज़्यादातर कारण अपच या फिर मांस – पेशियों में ऐठन होता है। अत्यधिज शारीरिक कार्य व भार उठाने से ऐठन की समस्या हो सकती है। अपच या किसी खाग्य- पदार्थों से एलर्जी से पेेेट में दर्द व जलन की समस्या हो सकती है।

महीने में एक बार कुछ समय तक होना पेट दर्द होना सामान्य होता है लेकिन बार – बार होने लगे तो कोई गंभीर समस्या हो सकती है।

किसी भी घरेलू नुस्खे के इस्तेमाल करने से पहले उसकी मात्रा पर ध्यान देना बहुत ही ज़रूरी है, लापरवाही से पेट दर्द की समस्या और भी बुरा रूप ले सकती है।

अगर आपके विचार में पेट दर्द (stomach pain in hindi) के अन्य सवाल है, तो comment करके ज़रूर बताय।

 

 


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